Tuesday, November 24, 2015

Life---                 24/11/15,Tuesday,12ish noon

Tamaashaa- तमाशा

सोचती हूँ मैं भी कि,ज़िन्दगी आज एक तमाशा ही है।बस एक नाटक---
सबको publicityचाहिये personal lives में भी।

हर समय ,हर जगह, हर एक ,केवल प्रतिस्पर्धा में लगा पड़ा है।

ख़ुद का तमाशा बना दूसरों को परोस रहा है।

कैसा यह अस्मत और मौन आतंक का कारोबार चल रहा है!

अपनों से privacy-space माँग कर हम अपना हर पल हर status ,public कर रहे हैं।

घर में तूफ़ान मचा कर , दूसरों की पीड़ा पर तौबा कर रहे हैं।

हवस है 'हर ' कुछ पाने की; लेकिन 'खुदी 'की पूँजी लुटा रहे हैं।

देख रही ख़ुद भी कि ,मैं भी हिस्सा हूँ इस तमाशे का;
खुली हैं आँखें , अचरज भी है बस लेकिन धकिल रही हूँ इस तमाशे में-----

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